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शहर की नहीं रेलवे को अपने नफा नुकसान की चिंता

 

कानपुर : अनवरगंज मंधना रेल लाइन हटाने को लेकर एक बार नहीं कई बार सर्वे किए गए। हर बार अधिकारियों ने लाइन हटाने को ही मुफीद माना। प्रिंसिपल एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ब्रिज) रेलवे बोर्ड दिल्ली को रिपोर्ट भी भेजी गई लेकिन नफा नुकसान की चिंता करने वाले रेलवे को शहर की चिंता कतई नहीं है। 

अनवरगंज मंधना रेलवे लाइन शहर के लिए कोढ़ से कम नहीं है। दरअसल इस लाइन पर बनी 18 रेलवे क्राङ्क्षसग हैं जो अक्सर बंद रहती, जिससे दिन में कई बार जीटी रोड पर जाम लगता। शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए मंत्री से लेकर जिला प्रशासन की ओर से भी रेलवे अधिकारियों को पत्र भेजे गए। सांसद देवेंद्र ङ्क्षसह भोले रेलमंत्री से मिले जिसके बाद तत्कालीन रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने अनवरगंज मंधना रेल लाइन का निरीक्षण किया था। रेलवे अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी को सर्वे के निर्देश दिए थे। आठ सितंबर 2018 को कमेटी ने सर्वे शुरू किया और 12 सितंबर को सर्वे पूरा कर रिपोर्ट ङ्क्षप्रसिपल एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ब्रिज) रेलवे बोर्ड दिल्ली को भेज दी गई। रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि शहर को जाम से निजात दिलाने को लाइन हटाना ही एकमात्र विकल्प है। पूरे प्रोजेक्ट में 1820 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान समिति ने लगाया था जिसमें 111 हेक्टेयर जमीन के लिए 1,365.45 करोड़ रुपये के साथ ही अन्य मदों में होने वाले खर्च का आंकलन शामिल था। करीब सात सौ करोड़ रुपये अनवरगंज मंधना रेल ट्रैक खाली होने के बाद बची जमीन को बेचकर प्राप्त हो जाने का जिक्र भी रिपोर्ट में है।  बावजूद इसके रेलवे बोर्ड ट्रैक हटाने का फैसला सिर्फ इसलिए नहीं किया कि उसमें रेलवे को खर्च करना पड़ेगा यानि उसे अपने खर्च की चिंता तो है पर शहर की नहीं।

50 से ज्यादा ट्रेनें दौड़ती हैं : अनवरगंज मंधना रूट पर 50 से ज्यादा ट्रेनें चलायी जाती हैं। इसमें पांच जोड़ी गुड्स ट्रेनें और शेष यात्री गाडिय़ां शामिल हैं। कोरोना के कारण अभी यह ट्रेनें नहीं चल रही। हालांकि सामान्य दिनों में इनकी वजह से हर दस मिनट में क्राङ्क्षसग बंद करनी पड़ती है।

मरीजों और व्यापारियों को ज्यादा समस्या : अनरवगंज मंधना रेल शहर को उत्तर दक्षिण में बांटती है। रेल लाइन का सबसे बड़ा असर मरीजों पर पड़ता है। जिला चिकित्सालय, कार्डियोलॉजी समेत अधिकतर बड़े निजी अस्पताल भी उत्तर में हैं। ऐसे में कई बार जाम में फंसकर मरीज देरी से अस्पताल पहुंचते हैं जो उनकी मौत की सबसे बड़ी वजह होती है। इसके साथ ही जरीब चौकी, गुमटी, कोकाकोला, रावतपुर, गुरुदेव, कल्याणपुर से आवागमन अवरूद्ध होने से व्यापारी सबसे ज्यादा परेशान होते हैं।

अनवरगंज मंधना रेल लाइन को लेकर सर्वे कराया गया था। इस विषय पर तब चर्चा भी हुई थी। रिपोर्ट किसे भेजी गई, अभी नहीं बता सकता। 

-अजीत कुमार ङ्क्षसह, सीपीआरओ एनसीआर

समस्या उत्तर मध्य रेलवे की है। उन्हें ही इसका विकल्प तलाशना है। विकल्प मिलेगा तो एनईआर विचार करेगा। 

-राजेन्द्र कुमार, जनसंपर्क अधिकारी एनईआर 

 

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